गोपेश्वर (चमोली)। जिला मुख्यालय गोपेश्वर को घिंघराण से जोड़ने वाले मोटर मार्ग पर स्थित ब्रह्मसैण कस्बा लगातार हो रहे भू-धंसाव के कारण खतरे की जद में आ गया है। सड़क के निचले हिस्से में धंसाव बढ़ने से आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर खतरा मंडरा रहा है, जबकि सड़क की स्थिति बिगड़ने से वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो गई है।
ब्रह्मसैण में पिछले वर्ष से ही भू-धंसाव की समस्या बनी हुई है। सड़क के नीचे करीब 50 मीटर हिस्से में लगातार जमीन खिसक रही है। इसके चलते सड़क भी जगह-जगह धंस रही है। वर्तमान में स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चौपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है, जबकि दोपहिया वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है। इससे आसपास के बड़े क्षेत्र के लोगों के सामने आवाजाही के साथ ही जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति का संकट खड़ा होने लगा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्ष भू-धंसाव के ट्रीटमेंट के लिए कार्ययोजना तैयार की गई थी, लेकिन अभी तक इसका धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया। लगातार हो रही बारिश के बीच धंसाव बढ़ने से अब रिहायशी इलाकों तक खतरा पहुंच गया है। लोगों का कहना है कि समय रहते उपचारात्मक कार्य शुरू नहीं किए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जल निकासी की व्यवस्था नहीं होना बना चिंता का कारण
ब्रह्मसैण क्षेत्र में तेजी से बढ़े भवन निर्माण और आबादी के विस्तार के बीच जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने को भी भू-धंसाव का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। लगातार पानी के रिसाव से जमीन के भीतर कमजोरी बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा गोपेश्वर नगर के विस्तार के दौरान भवनों और अन्य निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा भी लंबे समय से सड़क किनारे डाला जाता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबे के ढेर और पानी की उचित निकासी नहीं होने से जमीन पर दबाव बढ़ा है, जिससे भू-धंसाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
लोनिवि ने शुरू की सड़क दुरुस्त करने की कवायद
सड़क की स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने मार्ग को व्यवस्थित करने की कवायद शुरू की है। हालांकि जमीन के लगातार धंसने के कारण सड़क को स्थायी रूप से सुचारू करना चुनौती बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल सड़क की मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि भू-धंसाव के मूल कारणों का वैज्ञानिक तरीके से उपचार जरूरी है।
ब्रह्मसैण को आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र मानते हुए स्थानीय लोगों ने भू-धंसाव के तत्काल ट्रीटमेंट, जल निकासी की ठोस व्यवस्था और खतरे की जद में आए भवनों का तकनीकी सर्वे कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में भू-धंसाव आबादी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

