ज्योतिर्मठ। भगवान बद्री विशाल के शीतकालीन गद्दी पड़ाव स्थल, ऐतिहासिक नरसिंह मंदिर में गुरुवार को भगवान नरसिंह का प्राकट्य उत्सव (नरसिंह जयंती) पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर के लिए मंदिर परिसर को भव्य रूप प्रदान किया गया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि इस वर्ष भगवान के भव्य श्रृंगार और मंदिर की सजावट के लिए लगभग 25 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों का उपयोग किया गया है। उत्सव की पूर्व संध्या पर ही पूरा मंदिर परिसर फूलों की खुशबू से सराबोर हो उठा है, जिसे देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-दुनिया से आए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ही भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु स्तंभ फाड़कर नरसिंह अवतार लिया था और अत्याचारी राक्षस हिरण्यकश्यप का वध किया था। पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि वध के पश्चात जब भगवान का क्रोध शांत नहीं हुआ, तो वे अपने क्रोध को शांत करने के लिए ज्योतिर्मठ स्थित इसी स्थान पर पहुंचे थे। भगवान के शांत स्वरूप में यहाँ विराजमान होने के कारण ही इस सिद्धपीठ का महत्व अत्यंत विशिष्ट माना जाता है। गुरुवार को होने वाले इस मुख्य आयोजन के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ही बड़ी संख्या में भक्तों के जुटने की संभावना है, जिसके लिए मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

