बाल सरंक्षण आयोग की टीम ने चाणक्य डिफेंस कॉलेज का किया निरीक्षण, पाई गई कई खामियां

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष के निर्देशों के क्रम में आज आयोग की टीम द्वारा चाणक्य डिफेंस कॉलेज, कालागांव, देहरादून का निरीक्षण आयोग के सदस्य दयाल सिंह बिष्ट, डॉ. एस.के. सिंह, अनुसचिव, डॉ. निशात इकबाल, बाल मनोवैज्ञानिक तथा पुलिस विभाग से विशाल द्वारा किया गया। निरीक्षण के दौरान टीम ने छात्रावास, कक्षाओं, भोजनालय, पेयजल व्यवस्था, पुस्तकालय, चिकित्सा कक्ष, खेल सुविधाओं एवं बाल सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि संस्थान में लगभग 510 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। छात्रावास में लड़कों के डोरमेट्री कक्षों, जहाँ बच्चे विश्राम करते हैं, प्रत्येक कमरे में दो-दो सीसीटीवी कैमरे लगे हुए पाए गए। आयोग की टीम ने बच्चों की निजता के दृष्टिगत इस व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए छात्रावास के विश्राम कक्षों में कैमरों को हटाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि छात्रावास के प्रत्येक तल पर विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शौचालयों की संख्या पर्याप्त नहीं है। इसके अतिरिक्त ग्राउंड फ्लोर पर स्थित स्नानघर (बाथरूम) में बच्चों की निजता सुनिश्चित करने हेतु पर्याप्त व्यवस्था नहीं पाई गई। शिकायत बाक्स भी लगा हुआ नहीं दिखा।

बालिकाओं के छात्रावास के निरीक्षण में पाया गया कि कई कमरों के दरवाजे हटे हुए थे। छात्रावास में अत्यधिक सीलन एवं घुटन का वातावरण था तथा वेंटिलेशन की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। पेयजल स्थल पर भी साफ-सफाई का अभाव देखा गया। चिकित्सा सुविधा की समीक्षा के दौरान पाया गया कि संस्थान की इन्फर्मरी में केवल फार्मासिस्ट उपलब्ध था तथा नियमित चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। ऑक्सीजन सेलेंडर की सुविधा भी नहीं थी। आयोग की टीम ने बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से नियमित चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने व एक एम0बी0बी0एस0 डॉक्टर को स्थायी रूप से नियुक्त किये जाने पर बल दिया।

शैक्षणिक व्यवस्थाओं के निरीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि कक्षा 11 में प्रवेश लेने वाले कुछ विद्यार्थियों को यह तक जानकारी नहीं थी कि उनका नामांकन किस विद्यालय में किया गया है। निरीक्षण के दौरान डमी एडमिशन जैसी व्यवस्था की आशंका भी सामने आई। टीम ने यह भी पाया कि कक्षाओं में उपलब्ध कराई गई सीटें विद्यार्थियों के आयु एवं शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप नहीं हैं तथा उनका आकार छोटा है।

बाल संरक्षण संबंधी व्यवस्थाओं, शिकायत निवारण तंत्र तथा पॉक्सो समिति की भी समीक्षा की जो कि एकेडमी में नहीं देखा गया। कक्षा 11 में अध्ययनरत विद्यार्थियों को विद्यालयी पाठ्यक्रम के साथ-साथ सीधे प्रतियोगी परीक्षाओं (कोचिंग स्तर) की उन्नत पुस्तकों से अध्ययन कराया जा रहा है। टीम से बातचीत के दौरान कई विद्यार्थियों ने बताया कि इस कारण उन्हें विषयवस्तु को समझने में कठिनाई हो रही है तथा वे अनावश्यक शैक्षणिक दबाव महसूस कर रहे हैं। आयोग की टीम ने संस्थान प्रबंधन को निर्देशित किया कि विद्यार्थियों की आयु, कक्षा एवं शैक्षणिक स्तर के अनुरूप चरणबद्ध एवं संतुलित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे बच्चों पर अनावश्यक मानसिक एवं शैक्षणिक दबाव न पड़े।

इसके अतिरिक्त यह भी पाया गया कि संस्थान द्वारा अब तक प्रारंभ किए गए दो अलग-अलग बैचों को एक साथ मर्ज कर दिया गया है। परिणामस्वरूप बाद में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को पूर्व में पढ़ाए गए पाठ्यक्रम को समझने एवं अध्ययन की गति के साथ सामंजस्य स्थापित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आयोग ने इस व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रबंधन को विद्यार्थियों के हित में आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के उपरांत आयोग की टीम ने संस्थान प्रबंधन को निर्देशित किया कि निरीक्षण के दौरान इंगित की गई सभी कमियों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा की गई सुधारात्मक कार्यवाही की विस्तृत अनुपालन आख्या 10 दिवस के भीतर उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को उपलब्ध कराई जाए, ताकि आवश्यकतानुसार अग्रिम कार्यवाही की जा सके।

 

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

एमडीडीए का अवैध प्लाटिंग और निर्माण पर बड़ा एक्शन, 4 बीघा की अनधिकृत कॉलोनी ध्वस्त, बहुमंजिला भवन सील

Sat Aug 1 , 2026
देहरादून : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध प्लाटिंग और बिना स्वीकृत मानचित्र के हो रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून और ऋषिकेश में दो अलग-अलग स्थानों पर सख्त कदम उठाए। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार स्वीकृति के बिना किसी भी प्रकार का भू-विकास या […]

You May Like

Share
error: Content is protected !!