छात्र को नोटिस जारी करने पर सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट को फटकारा, मांगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रचार करने वाले एक लॉ छात्र को शांति व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब एक सितंबर को छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए गए थे, तो इसके बावजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस कैसे जारी कर दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष बुधवार को यह मामला उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से मामले की जानकारी देते हुए बताया कि नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दूसरे वर्ष के लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी को नोटिस जारी किया था। हालांकि बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया।

नोटिस जारी करने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

मामले पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद किसी मजिस्ट्रेट को छात्र के खिलाफ इस तरह का नोटिस जारी करने का अधिकार कैसे मिला। उन्होंने कहा कि अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि छात्र विरोध प्रदर्शनों के संबंध में छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। पीठ ने यह भी पूछा कि जब नोटिस वापस लिया जा चुका है तो अब कार्रवाई का आधार क्या बचता है। इस पर अधिवक्ता ने कहा कि नोटिस जारी करना ही अदालत के आदेश की अवमानना का विषय है और बाद में उसे वापस लेने से मामला खत्म नहीं होता।

कोर्ट ने मांगा अधिकारी से स्पष्टीकरण

CJI ने अधिवक्ता को निर्देश दिया कि नोटिस को याचिका के माध्यम से रिकॉर्ड पर लाया जाए। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से छात्रों के बीच भय का माहौल पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।

पुलिस रिपोर्ट के आधार पर जारी हुआ था नोटिस

जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट-III की अदालत ने छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/135 के तहत नोटिस जारी किया था। यह कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी।

चार सितंबर 2026 के नोटिस में आरोप लगाया गया था कि छात्र विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों के बीच सरकार विरोधी और कथित तौर पर भ्रामक बातें फैला रहे थे तथा उन्हें प्रस्तावित CJP धरने में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। हालांकि, नोटिस बाद में वापस ले लिया गया। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। अब अदालत के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारी का स्पष्टीकरण इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

उत्तराखंड बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति में 2027 की रणनीति पर मंथन, तीसरी बार सरकार बनाने का संकल्प

Wed Sep 9 , 2026
हल्द्वानी। उत्तराखंड में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया। कार्यसमिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की उपलब्धियों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के विकास कार्यों को […]

You May Like

Share
error: Content is protected !!