रामणी में नंदा डोलियों के मिलन पर छलकीं आंखें, उमड़ा आस्था का सैलाब

गोपेश्वर (चमोली)। मां नंदा की बड़ी जात के नौवें दिन शनिवार को रामणी गांव आस्था के महासंगम का साक्षी बना। बंड और दशोली कुरूड की नंदा डोलियों के मिलन के साथ ही बंड, फर्स्वाण फाट, क्षेत्रपाल और निजमुला घाटी से पहुंचीं 50 से अधिक छंतोलियों ने माहौल को भक्तिमय कर दिया। डोलियों और छंतोलियों के मिलन का भावुक दृश्य देखकर नंदा भक्तों की आंखें छलछला उठीं। भूमियाल चैक में देर रात तक नंदा के जयकारे, लोकगीत, जागर और देवताओं के पश्वाओं के पारंपरिक लोकनृत्य गूंजते रहे।

बड़ी जात में शामिल होने के लिए देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से नंदा भक्त रामणी पहुंच रहे हैं। शनिवार शाम पांच बजे से डोलियों और छंतोलियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा। ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा, लोकगीतों और जागरों के साथ सभी डोलियों और छंतोलियों का भव्य स्वागत किया।

बंड नंदा की डोली शनिवार को गौणा गांव से गौणा डांडा, विनायकधार होते हुए रामणी पहुंची। वहीं दशोली कुरूड की नंदा डोली ल्वाणी से सुंग और बौठाखाल होते हुए रामणी पहुंची। बधाण की नंदा डोली चेपड़ो से धार तल्ला पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया।

रामणी के भूमियाल चैक में डोलियों और छंतोलियों के मिलन का दृश्य देखते ही बन रहा था। देवताओं के पश्वाओं ने देर रात तक पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए। उनके हैरतअंगेज नृत्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा रामणी गांव नंदा के जयकारों और पारंपरिक लोकधुनों से गूंजता रहा।

बंड नंदा डोली के साथ अशोक गौड़, भूमियाल की छंतोली के साथ नरेंद्र खाती, गेंदाणु छंतोली के साथ जगत सिंह नेगी, बंड मंदिर समिति के अध्यक्ष जगत सिंह नेगी, सचिव रघुनाथ सिंह फर्स्वाण, प्रदीप नेगी समेत बड़ी संख्या में नंदा भक्त और श्रद्धालु शामिल रहे।

 

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