आरटीआई में लापरवाही पर राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर ने की बड़ी कार्रवाई, तहसीलदार ऋषिकेश पर 10 हजार और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर 5 हजार की शास्ति

  • रानीपोखरी ग्रांट की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत से जुड़ी सूचना न देने पर सख्ती

देहरादून। रानीपोखरी ग्रांट की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायत की सुस्पष्ट और पूर्ण सूचना उपलब्ध न कराने पर उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने ऋषिकेश तहसील के तहसीलदार प्रदीप नेगी पर 10 हजार रुपये और लोक सूचना अधिकारी एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रेखा राणा पर 5 हजार रुपये की शास्ति अधिरोपित की है। राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर ने 25 अगस्त 2026 को जारी आदेश में तहसीलदार का स्पष्टीकरण अस्वीकार करते हुए आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत कार्रवाई की। वहीं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रेखा राणा का स्पष्टीकरण भी अस्वीकार कर उन पर 5 हजार रुपये की शास्ति लगाई गई।

शिकायत पर हुई कार्रवाई की मांगी गई थी पूरी जानकारी

मामला शिकायतकर्ता महेश कुमार द्वारा 3 अगस्त 2024 को तहसीलदार ऋषिकेश को दिए गए उस शिकायती पत्र से जुड़ा है, जिसमें रानीपोखरी ग्रांट की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जाधारियों के संबंध में कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने इस प्रकरण में की गई कार्रवाई से संबंधित सूचना मांगी थी। सूचना उपलब्ध कराने को लेकर मामला उत्तराखण्ड सूचना आयोग तक पहुंचा।

आयोग के निर्देश के बाद हुआ संयुक्त सर्वे

आयोग के पूर्व आदेश के अनुपालन में वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने 9 अप्रैल 2026 को प्रश्नगत भूमि का स्थलीय निरीक्षण एवं सर्वे किया। वन क्षेत्राधिकारी की ओर से आयोग को दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि खसरा संख्या 1885ख, क्षेत्रफल 0.0500 हेक्टेयर, राजस्व अभिलेखों में वन विभाग के प्रबंधन में दर्ज है, लेकिन यह आरक्षित वन सीमा से बाहर स्थित है और मौके पर वन का स्वरूप नहीं पाया गया।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि संयुक्त सर्वे के दौरान उक्त भूमि पर अतिक्रमण पाया गया। वन विभाग ने बताया कि राजस्व विभाग द्वारा नियमानुसार चिन्हीकरण और अतिक्रमण हटाने के बाद भूमि को उसके मूल स्वरूप में वन विभाग के कब्जे एवं सुपुर्दगी में लेने की कार्रवाई की जाएगी।

तहसीलदार का स्पष्टीकरण आयोग ने किया अस्वीकार

तहसीलदार प्रदीप नेगी ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि आयोग के निर्देश पर संयुक्त स्थलीय सर्वेक्षण के लिए राजस्व अधिकारियों को नियत तिथि पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे और राजस्व निरीक्षक की जांच आख्या भी उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता की 3 अगस्त 2024 की शिकायत पर की गई संपूर्ण कार्रवाई के संबंध में सुस्पष्ट सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसे आयोग के आदेश की अवहेलना और आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए स्पष्टीकरण खारिज कर दिया गया।

मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर भी कार्रवाई

लोक सूचना अधिकारी एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रेखा राणा ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि आयोग से प्राप्त निर्देशों का तत्परता से अनुपालन किया गया और उपलब्ध सूचनाएं शिकायतकर्ता को भेजी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त निरीक्षण के लिए टीम गठित करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं था। आयोग ने उनका स्पष्टीकरण भी अस्वीकार करते हुए धारा 20(1) के तहत 5 हजार रुपये की शास्ति अधिरोपित की।

सूचना आयोग ने निस्तारित की शिकायत

राज्य सूचना आयोग ने दोनों अधिकारियों पर लगाई गई शास्ति की राशि ई-चालान के माध्यम से जमा कराने के निर्देश दिए हैं। लोक प्राधिकारी को शास्ति की वसूली कर आयोग को सूचित करने के लिए भी कहा गया है। आदेश में शिकायत को निस्तारित करते हुए पत्रावली दाखिल दफ्तर करने के निर्देश दिए गए हैं।

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